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September 13, 2016

इक बादल

बादलो को देख रहा था
तमन्ना ए चाँद की थी ।
बस एक बूंद का इंतज़ार था
लगता था बारिश होगी ।
पर वो बादल ऐसा फटा
छाई ऐसी काली घटा ।
पानी की हर बून्द को तरसे
गरजे बादल कभी न बरसे ।
और जो दिख रहा था चाँद हमे ...
जो दिख रहा था चाँद हमे..
वो तो बस एक जुगनू निकला ।।

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