क्यों इतना आज गुमसुम हूं
क्या मन उदास है मेरा ।
जीना ही भूल गया हूँ जैसे
कहा गुमशुदा प्रकाश है मेरा ।
की कुछ कमी है ,कुछ कमी है
कुछ कमी है यहाँ ।
या दुःख से खुद को देखकर
मन रो रहा है मेरा ।
मेरी चौखट पे खटखट की आवाज़े बंद हो गयी है ।
आवाज़े बंद हो गयी है।
कोई चुटी तो काटो रे ।२।
हकीकत है या भ्रम मेरा ।
क्यों इतना आज गुमसुम हूं
क्या मन उदास है मेरा ।।